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मुजफ्फरपुर जिले के औराई प्रखंड में मिड डे मील संवेदकों के द्वारा फर्जी जीएसटी बिल से लगाई सरकार को लाखों की चपत

मध्यान्ह भोजन में व्यापक घपलेबाजी, फर्जी जीएसटीएन नंबर लगे बिल द्वारा सरकार को लाखों के टैक्स की चपत। एसडीओ पुर्वी ने पहले हीं छात्रों की फर्जी उपस्थिति, भंडार पंजी एवं बिल में अनियमितता साबित होने पर संविदा रद्द कर कारवाई की अनुशंसा की थी।

 

TEAM IBN-मुजफ्फरपुर जिला के औराई प्रखंड में विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन योजना में अधिकतर विद्यालय में अटेंडेंस में चोरी तो की ही जा रही थी और फर्जी छात्र की हाजिरी बनाई जा रही थी तथा प्रखंड के अधिकतर विद्यालयों में बच्चों को मेनू के अनुसार भोजन नहीं मिल रहा है। जिस पर ना तो शिक्षा विभाग कोई कार्रवाई कर पा रही है और ना ही स्थानीय जनप्रतिनिधि ही कोई ऐसा कदम उठा पाते जिससे कम से कम छात्रों को मध्यान्ह भोजन योजना में फर्जीवाड़ा से मुक्ति मिलती है। और जो बिहार सरकार के योजना में जो दूर दृष्टि देखी गई थी कि इससे बच्चों की उपस्थिति बढ़ेगी और कुपोषण से भी मुक्ति मिलेगी उसमें पलीता लगता दिख रहा है। बता दें कि औराई में मिड डे मील में फर्जी उपस्थिति ,मेंनू के अनुसार भोजन नहीं देने की पुष्टि जिले के अधिकारियों की टीम ने भी की थी जिसमें अनुमंडल अधिकारी पूर्वी ने करवाई की अनुशंसा की थी जिसमें अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है ।वह मामला अभी ठंडा पड़ा भी नहीं था की ताजा मामला औराई में फर्जी जीएसटी बिल के सहारे संवेदको द्वारा लाखों की अवैध निकासी की बात सामने आई है

ये है मामला-

सरकारी विद्यालयों में मध्याहन भोजन की सामग्री की आपुर्ति प्रधान शिक्षक एवं मध्यहान भोजन प्रभारी की अनुशंसा से नियुक्त भेंडर द्वारा की जाती है। संवेदक का फर्म रजिस्टर्ड होना चाहिए और सरकार द्वारा निर्धारित जीएसटी पेयर होना चाहिए। भेंडर को पैसे का भुगतान पीएफएमएस के माध्यम से प्रधान शिक्षक द्वारा देय होता है। लेकिन विद्यालयों में कई फर्जी बिल सामने आये हैं जिनके माध्यम से सरकार को बडे पैमाने पर टैक्स की चपत लगी है यहां तक की कई बिल पर फर्जी जीएसटीएन नंबर दर्ज है। जब इस संबंध में जब एक संवेदक से पुछा गया तो उन्होने स्वीकार किया कि ऐसे हीं व्यवस्था चल रही है। औराई में विद्यालयों के प्रधान शिक्षक ने जानकारी में अनभिज्ञता दर्शायी और मध्याहन भोजन प्रभारी से पुछने को कहा और बताया कि उनके पास हीं विद्यालयों का पीएफएमएस आडडी पासवर्ड होने और आपरेट होने की बात बतायी। इस संबंध में एक चौकाने वाली बात सामने आयी कि पुरे मामले का मास्टरमाईंड औराई के एक विद्यालय का हीं शिक्षक है जो विभिन्न विद्यालयों को एमडीएम प्रभारी के सहयोग से फर्जी बिल उपलब्ध करवाता है। बिल दरभंगा, गायघाट समेत कई जगहों का है।
अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा 9 सितंबर को एक गोपनीय पत्र द्वारा बीइओ एवं एमडीएम प्रभारी को चार बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया था जिसमें मध्याहन भोजन मेनु के अनुसार नहीं दिया जाने, एमडीएम का भाउचर एवं विपत्र नहीं उपलब्ध कराये जाने, भंडार पंजी का संधारण नहीं किया जाना एवं फर्जी ढंग से बच्चों की उपस्थिति दर्ज किया जाना शामिल है। कारवाई के लिए संविदा रद्द तक करने तक की बात की गयी है। लेकिन अब तक कारवाई को ठंढे बस्ते में डाल दिया गया है।  जब एक विद्यालय में पडताल करने पर पता चला कि  स्वयं विद्यालय के शिक्षक तक ने फर्जी हाजीरी की बात दवाब में बनाने की बात स्वीकार की जहां 100 से अधिक फर्जी हाजीरी बनायी गयी थी। मामला छुपाने के लिए कई विद्यालय प्रधान द्वारा आइवीआर सिस्टम से आये कॉल को रिसीव नहीं किया जाता है। सवाल है कि नौनीहालों के भोजन किस सिस्टम की भेंट चढ रहे हैं , आखिर आरोप साबित होने के बाद कारवाई से अधिकारी क्यों बच रहे हैं।

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